लगातार चार बार असफल, मां बनी, पांचवी बार में सफलता को प्राप्त किया – आज की नारी सुवा विश्नोई की सफलता की कहानी

नमस्कार मित्रों कहते हैं कि जब एक जगह पर सफलता नहीं मिलती तो हमें अपने लक्ष्य को बदल लेना चाहिए लेकिन सच यह भी है कि जब तक उस लक्ष्य के लिए जी जान से मेहनत ना की जाए और धैर्य के साथ उस लक्ष्य की और नहीं बढ़ा जाए तब तक कोई भी लक्ष्य प्राप्त करना मुश्किल ही लगता है | कुछ ऐसे ही हालातों में अपने सफलता की सीढ़ी चढ़ी गांव नौसर की एक बेटी की कहानी आज आपको मैं बताने जा रहा हूं जिसको सुनकर आपको भी प्रेरणा मिलेगी |

Suva Visanoi nosar Biography

जोधपुर जिले के ओसिया तहसील में एक गांव है नौसर और वहां के भाकर राम जी विश्नोई की बेटी सुवा विश्नोई जिन्होंने कड़ी मेहनत के और विषम परिस्थितियों के बावजूद भी अपने जोश और जुनून को बरकरार रखते हुए सफलता को प्राप्त किया

सुवा बचपन से ही गांव में ही रहती और गांव में ही अपनी पढ़ाई को पूरा किया । जैसे-जैसे बड़ी होती गई अपने मन में यह ठान लिया कि मुझे सरकारी नौकरी करनी है । टाइम आगे बढ़ता गया दसवीं कक्षा पास करने के बाद मन में जोश और जुनून के साथ पुलिस कांस्टेबल की तैयारी में जुट गई ।

परिवार वाले बताते हैं की सुवा बचपन से ही निडर और साहसी रही है 2010 में जब पहली बार पुलिस कांस्टेबल का एग्जाम दिया तो वह उस में असफल रही ।

परिणाम आने पर उसने अपने आप को मोटिवेट किया की प्रथम बार में सफल होना आसान नहीं है इसलिए अगली बार के लिए मेहनत की जाए फिर से वही जोश और जुनून के साथ अपनी पढ़ाई को जारी रखा और तैयारी में जुट गई ।

इसके साथ ही 2008 में दूसरी बार स सुवा ने उसी विश्वास के साथ अपने परीक्षा को देने का मन बनाया और परीक्षा में उपस्थिति दर्ज कराई लेकिन जब परिणाम आया तब भी उसमें सुआ का नाम नहीं था लेकिन सुवा ने अपने आप को कभी भी Demotivate नहीं होने दिया अपने आपको समझाया और फिर से एक बार तैयारी में जुट गई

समय निकलता गया खुद पर जिम्मेदारियां भी बढ़नी शुरू हो गई, उम्र भी बढ़ रही थी, सुवा की शादी कर दी गई लेकिन अभी भी तैयारी जारी थी ।

2010 में फिर से एक कांस्टेबल की वैकेंसी निकली जिसमें उसने परीक्षा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और इस बार मन में यह ठान लिया था कि अबकी बार किसी भी हालत में सफल होकर दिखाना है ।

जब परीक्षा का लिखित परिणाम घोषित हुआ तो उसके अंदर सुवा का नंबर आया हुआ था सुवा ने परीक्षा को पास कर लिया । अब उसके सामने फिजिकल टेस्ट पास करने की चुनौती थी ।

वैसे सुवा फिजिकल टेस्ट को पास कर लेती थी लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था जब फिजिकल टेस्ट का टाइम आया उस समय सुवा गर्भवती थी ।

अपने मन को मनाते हुए सुवा ने फिजिकल टेस्ट नहीं देने का निर्णय लिया सुवा को ऐसा लग रहा था कि मेरी पूरी जिंदगी का क्या यह सही निर्णय है……

सुआ के सामने अजीब परिस्थिति बन चुकी थी भगवान उसके धैर्य की परीक्षा ले रहा था हालांकि सुआ इस फिजिकल टेस्ट में पास भी हो जाती और वह अपने लक्ष्य को प्राप्त भी कर लेती लेकिन भगवान ऐसा नहीं चाहता था जो भी हुआ अब यही कहा जाता है कि उस समय सुवा ने एक सूझ बूझ भरा निर्णय लिया ।

समय निकलता गया लेकिन सुवा के मन में राष्ट्र सेवा के प्रति अपनी जोश और जुनून कभी भी कम नहीं हुआ और उसने अपनी तैयारी को जारी रखा इस प्रकार 2013 में पुलिस कांस्टेबल की एक और भर्ती का नोटिफिकेशन जारी हुआ और उसने उस परीक्षा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई इस बार मानो ऐसा लग रहा था कि सुवा को अब सफलता मिल जाएगी

लेकिन परिणाम सुआ के पक्ष में नहीं आया और वह इस बार भी असफल हो गई । बार-बार असफल होने से सुवा का मन भी विचलित होने लगा लेकिन यही समय होता है कि जब आप बार-बार असफल हो रहे हैं आपको सफलता नहीं मिल रही हैं फिर भी आपको कोशिश करते रहना है ।

सुवा ने जैसे तैसे अपने मन को मनाते हुए फिर से तैयारी जारी रखने का निर्णय लिया । सुवा के लिए यह बिल्कुल भी आसान नहीं था क्योंकि जब कोई व्यक्ति इतनी बार असफल हो जाता है तो उसके मन में यह विचार जरूर आते हैं ।

समय के साथ सुवा चलती गई और 2016 में एक और परीक्षा में उपस्थिति दर्ज कराई और रिजल्ट अबकी बार सुवा के पक्ष में आया और फिजिकल टेस्ट भी सुवा ने पास कर लिया । अब अंतिम परिणाम आने की बारी थी सुवा को पूरा विश्वास था कि अबकी बार सफलता मिल जाएगी सुवा के घरवाले, परिवार वाले भी यही सोच रहे थे कि अबकी बार सुवा को सफलता मिल जाएगी

जब अंतिम परिणाम जारी हुआ और सुवा को पता चला कि मैं अंतिम रूप से पुलिस कांस्टेबल परीक्षा में सफल हो चुकी हूं तब सुवा के खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा उसके परिवार वाले व उसके ससुराल वाले भी बहुत खुश थे ।

तो इस तरह से सुआ विश्नोई ने अपने गांव का नाम रोशन किया और  करके दिखाया कि अगर आप मन में ठान लेते हैं तो कोई भी परिस्थितियां उस लक्ष्य को आप तक पहुंचने में बाधा नहीं डाल सकती । शर्त यह होनी चाहिए कि आपको उस लक्ष्य के प्रति दृढ़ता से, धैर्य पूर्वक और निष्ठा पूर्वक उसकी और हमेशा बढ़ते चले जाना है आपको सफलता एक ना एक दिन जरूर मिलेगी ।

आशा करता हूं मित्रों इस कहानी को सुनकर आप भी प्रेरित हुए होंगे अगर आप भी इन सभी प्रकार की समस्याओं से जूझ रहे हैं और आपको भी सफलता नहीं मिल रही हैं तो आप भी संघर्ष जारी रखें अपने लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाते रहें आपको सफलता एक न एक दिन जरूर मिलेगी क्योंकि सफलता किसी का गुलाम नहीं है ।

फिर से मुलाकात होगी एक नई प्रेरणादायक कहानी के साथ तब तक दीजिए इजाजत जय हिंद

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